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जन्मस्थान... शामली जिला शामली उत्तर प्रदेश, कर्मस्थान..... वर्तमान में लखनऊ

शनिवार, जनवरी 01, 2011

नववर्ष की शुभकामनाओं के साथ मेरा एक नया गीत

माना के मुश्किल हैं टेढ़े भी हैं
सीधे ये जीवन के रस्ते नहीं
पर जिन्दगी रूठ जाती है उनसे
जो रोते ही रहते हैं हंसते नहीं

दुख का ये बादल भी छंट जायेगा
ये एक लम्हा है कट जायेगा
आंसू की माला पिरोना ना तुम
मोती हैं ये इनको खोना ना तुम

आंसू ये तेरे अनमोल है महंगे बडे. हैं ये सस्ते नहीं
हां जिन्दगी रूठ जाती है उनसे जो रोते ही रहते हैं हंसते नहीं


ना भूलना मुस्कुराना कभी
इक दौर अच्छा है आना अभी
रूकना नहीं इस पल में तुझे
खुशियां मिलेंगी कल में तुझे

ये पल तो केवल ठहराव है मंजिल नहीं इसमें बसते नहीं
हां जिन्दगी रूठ जाती है उनसे जो रोते ही रहते हैं हंसते नहीं


माना के ऐसा भी हो जाता है
दिल ये अकेले में रो जाता है
इक कारवां पर तेरे साथ है
सर पे मौहब्बत भरे हाथ हैं

दम दोस्ती का अगर संग हो फिर यूं सुखों को तरसते नहीं
हां जिन्दगी रूठ जाती है उनसे जो रोते ही रहते हैं हंसते नहीं


दीक्षित

6 टिप्‍पणियां:

  1. प्रेरक रचना - नव वर्ष की मंगल कामना

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  2. बहुत बढ़िया लिखा है "आंसू की माला पिरोना ना तुम, मोती हैं ये इनको खोना ना तुम" आशा है इसी तरह आपके अंतर्मन से मुलाकात होती रहेगी

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  3. प्रिय बंधुवर चन्द्रकांत दीक्षित जी
    सादर सस्नेहाभिवादन !

    अच्छा रचने के सुंदर प्रयास आपके पूरे ब्लॉग पर नज़र आए । आपकी कविता प्रथम भी आ चुकी है… उसकी भी बधाई !
    नई रचना की प्रतीक्षा रहेगी …

    ♥ प्यारो न्यारो ये बसंत है !♥
    बसंत ॠतु की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  4. uff,,yahan aa kar aisa lagta hai k padhe likhon k beech anpadh ganwaar aa gaya.anyway, very nice poem- DK

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  5. बहुत अच्छा लगा.. कविता .धन्यवाद

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  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति| धन्यवाद|

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