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जन्मस्थान... शामली जिला प्रबुद्धनगर उत्तर प्रदेश, कर्मस्थान..... वर्तमान में लखनऊ

Monday, February 20, 2012

अल्पविराम

ब्लॉग लेखन से समयाभाव के कारण कुछ समय के लिए विराम ले लिया है

Saturday, December 24, 2011

सिगरेट

एक आपबीती सुनिए.... हाल ही में लखनऊ से बाहर गया था, वहाँ एक साहब ने सिगरेट पेश करते हुए कहा कि पीजिए. मैंने कहा जी मैं सिगरेट नहीं पीता. बड़े आश्चर्य और स्टाइल से मुझसे सवाल किया गया आप सिगरेट क्यों नहीं पीते?? मैंने उन्हें उसी स्टाइल में जवाब दिया... 

सिगरेट की इतनी औकात नहीं है कि मेरे होठों से लग सके.

वो बस मेरा चेहरा देख रहे थे......

Thursday, December 15, 2011

कलर सिंह

कलर सिंह ! क्या आपने ये नाम कभी सुना है? शायद नहीं सुना होगा. दरअसल एक सप्ताह पहले मैंने भी नहीं सुना था. पिछले सप्ताह रुड़की (उत्तराखंड) में कलर सिंह नाम के एक सज्जन से मेरी मुलाकात हुई. वो राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान में काम करते हैं. मैंने उनसे इस अनोखे नाम रखने के बारे में पूछा तो पहले तो आश्चर्य हुआ कि आज तक उनके सहकर्मियों ने उनसे ये बात नहीं पूछी थी, खैर कलर सिंह ने बताया कि जब वो तीन साल के थे गंभीर रूप से बीमार पड़ गए थे और मरणासन्न हो गए थे. तब एक डाक्टर ने उनका इलाज करके उनकी जान बचाई थी. उन डाक्टर का नाम था डा. कालरा जिनके नाम पर घरवालों ने उनका नाम कलर सिंह रख दिया.
 ......
यही हैं जनाब कलर सिंह
(विवरण एवं चित्र कलर सिंह की सहमति से ब्लाग पर प्रकाशित किया गया है)

Friday, November 11, 2011

11-11-11


बात 12 फरवरी 2000 की है मैं उस समय मेरठ विश्वविद्यालय परिसर से M.Sc. कर रहा था मेरे बैच में 9 छात्र और 2 छात्राएं थे. उस दिन हम सब अपने ही एक साथी का जन्मदिन मनाने के लिए विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार के सामने चाचा रेस्टोरेंट में एकत्र हुए थे. सभी लोग बातचीत कर रहे थे कि एक मित्र अशोक ने कहा कि उसने अपने एक पुराने मित्र के साथ वादा कर रखा है कि चाहे कहीं भी रहे पर 11-11-11 को वो उस मित्र से प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन पर मिलेगा. उसकी बात सुन कर मैंने कहा कि हम सब बैचमेट भी ऐसे ही मिलने का तय कर लेते हैं. इस पर खूब चर्चा हुई, 2000 लीप वर्ष था तय हुआ हर 29 फरवरी को मिला जायेगा.
दुर्भाग्यवश उस दिन जिस मित्र का जन्मदिन मना रहे थे वो एक महीने बाद ही एक सड़क दुर्घटना में नहीं रहा.
वक्त बीता चार साल बाद 2004 में 29 फरवरी को 10 में से 9 बैचमेट मेरठ विश्वविद्यालय परिसर में एकत्र हुए, पूरानी यादें ताजा की.
फिर चार साल बाद 2008 में सब लोग और ज्यादा व्यस्त हो गए फिर भी 6 लोग इक्कठे हुए, हाँ इस बार जगह बदल गयी थी सब दिल्ली में मिले. तय हुआ कि 2012 में सब परिवार सहित इक्कठे होंगे.
आज 11-11-11 को ये सब याद आ गया क्यों कि इसी तारीख से बात शुरू हुई थी. आज अशोक से बात नहीं हो पाई पता नहीं वो आज उस मित्र से प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन पर मिला कि नहीं, बात होंगी तो आपसे जरूर बताऊंगा.


मैंने जो लिखा उसके बारे में मित्र अशोक के विचार जानने के लिए यहाँ चटका (Click) लगाएं